राहुल बाबा-की सामन्ती सोच

अप्रैल 22, 2007 at 1:43 अपराह्न (राजनीति के अखाड़े से)

कुछ लोग धरती पर जन्म नहीं लेते, बल्कि अवतरित होते हैं/ और कभी कभी भगवान अवतारों की झड़ी लगा देता है/ वैसे भी पुन्य भूमि अजनाभवर्ष भारत के लिये प्रसिद्ध है कि यहां देवता भी जन्म लेने के लिये लालायित रहते हैं, शायद भगवान को भी जन्म लेने के लिये कुछ जुगाड़ भिड़ाना पड़ता होगा. या ये भी हो सकता है कि जुगाड़ न बैठ सका हो या भगवान कुछ दूसरे कामों मे व्यस्त रहे होंगे तो अपने प्रतिनिधि के बतौर नेहरू परिवार को भेज कर मानव मात्र विशेषतौर पर भारत पर अपनी कृपा की वर्षा की/ वैसे भी हमारे यहां परिवारों का अलग महत्व होता है “अच्छा तो जनाब फ़लां खानदान के हैं” खानदान के मुगालते से खुश फ़हम लोग वैसे भी आदमी को न तौलके उसके मरे हुये बाप ददा को तौलते रहते हैं/

अब ऐसे में अगर राहुल बाबा कह दें कि यह उनके परिवार का ही काम है कि जिसने पाकिस्तान को सबक सिखाने में कभी कोताही नहीं बरती, तो इतना चिल्लपों भाजपाइयों या किन्हीं और विपक्षियों को मचाने की ज़रूरत क्या है? गनीमत यह रही कि बाबा ने यह नहीं कहा कि “अरे मूढ़मतियो, ये तो हमारे परिवार् का एहसान है कि हम तुम पर शासन कर रहे हैं वरना तुम्हारा क्या होता?” वैसे राहुल बाबा चाहते तो यह भी याद दिलाई जा सकती थी कि हमारे परिवार ने तुम्हे आज़ादी दिलाई है न कि किसी गांधी या सुभाष जैसे नेतृत्व ने/

वैसे राहुल बाबा का इसमें कोई विशेष गलती नहीं है/ तमाम सारे बुजुर्ग कांग्रेसियों को उनमें राजीव जी की छवि दिखाई देती है / राजीव जी भी ऐसे ही अपने भाषणों के लिए अपने सखामण्डली पर निर्भर रहा करते थे/ दर-असल भाषण की उधारी की तुलना में विचारों की उधारी खाना ज़्यादा दयनीय दशा है/ राहुल बाबा का दोष नहीं है उन्हें शायद मां के पेट में ही अभिमन्यु की तरह चुनावव्यूह भेदन की शिक्षा मिल गई होगी/ बची खुची कसर थुलथुलाते शरीर ले कर मैडम की स्पीड पकड़्ने को आतुर पुराने कांग्रेसियों ने पूरी कर दी होगी/ उन्होनें राहुल बाबा को समझाया होगा कि देखिये सर अगर इन जाहिलो पर आप शासन नहीं करेंगे तो ये आपस में लड़ मरेंगे और राज करने का ठेका आपके परिवार को ही दिया गया है/ ये ईश्वरीय वरदान है इसे कोई बदल नहीं सकता/”जिन लोगों को हिन्दुस्तान की जानकारी विदेशी विश्वविद्यालयों में इन्डोलॊजी की किताबें पढ़ के होती है, वे यहां आके राज करने का दावा करें और सब के सब कथित ज़मीन से जुड़े हुये बुजुर्ग नेता दौड़ पडे चरण रज पाने को/ जय हो/ हम कृतकृत्य हुए देव कि आपने हमें इस लायक समझा कि आप हमें शासित होने का मौका दें/’अगर गांधी परिवार का प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद नहीं गिराई जाती’ बाबा के बयानों की एक और बानगी देखिए/ बस इसमें इतना जोड़ने की गुस्ताखी करूंगा कि अगर गांधी परिवार क प्रधानमंत्री नहीं होता तो शायद देश में एमर्जेन्सी भी नहीं लगती और हिन्दुस्तान शायद सन बासठ की लड़ाई नहीं हारता और शायद कश्मीर समस्या अतिबौद्धिकता के अखाड़े के पहलवानों की नूराकुश्ती से बच जाती/ 

2 टिप्पणियाँ

  1. Alok said,

    wah sir , wapsi par badhai. uttam lekhni, lage rahiye sir.

  2. bhaskar said,

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