पुनरागमन

अप्रैल 14, 2007 at 6:03 अपराह्न (Uncategorized)

प्रिय मित्रोयह ब्लोग पहले चल रहा था blogspot पर मगर तमाम सारी वजहों से यह स्थायी नही रह सका, जिसमें सबसे बड़ी वजह थी हमारा आलस बहरहाल blogspot ने आखिरकार हमारी ब्लोग से हमारा ही अधिकार छीन लिया तो सोचा कि दूसरे मोहल्ले में दुकान लगाई जाये/ बहुत बार दोस्तों ने पूछा है कि सम्बदिया का मतलब क्या है? इसके मायने क्या है? तो उन आदरणीय पाठकों की जानकारी हेतु बता दूं कि सम्बदिया का मतलब होता है एलची, खबरची, दूत, सम्वाद वाहक/ महान कथाकार फ़णीश्वर नाथ “रेणु” की एक प्रख्यात कहानी का नाम भी है/ सम्वदिया दोबारा शुरू करने की ललक काफ़ी दिनो से मन में थी मगर बस आलस्य और दीर्घसूत्रता के कारण काम हो ही नहीं पा रहा था.. उस पर मज़ा ये कि लिखने का सरन्जाम तमाम गायब..बहरहाल कुल जमा बात ये कि लिखने का क्रम इसमें टूट गया.इस बार कोशिश रहेगी कि अपनी कवितायें झिलाने के अलावा कुछ और भी लिख सकूं/रोज़ सुबह का अखबार कुछ न कुछ नया दे डालता है विचार-मन्थन को/ अपने यहां मुद्दों की कमी है क्या? एक छॊड़ हज़ार मिलते हैं/

2 टिप्पणियाँ

  1. नितिन बागला said,

    भला हो संतोष का जिसके ब्लाग पर पढ कर तुम्हारे इस नये ठिकाने पर पहुँच गया…और आपको पढ कर धन्य भया…अन्यथा आप तो कभी बताते नही…
    यार दो साल साथ रहने का इतना अधिकार तो बनता है…

  2. नितिन बागला said,

    खडी पाई लगाने के लिये ‘Shift’ + ‘\’ का प्रयोग करें…

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