जलती है ट्यूब लाईट
सफ़ेद और सफ़ेद
फिर भक से बुझ जाती है
दिया ठहरता ठहरता जलता है
जैसे जंगल में लगी हो आग
और फिर पानी पड़ गया हो ऊपर ऊपर
नाचती है कठपुतली धमधम रुक रुक धमधम
दूर नगड़िया की चोट पर कर रही बेडनी नाच
मैया के मेले में मानता पूरी करने
गंध शब्द सब उड़ उड़कर उड़ते हैं कहीं
किन्हीं कोनों से
मैं निर्वसन समाता हूँ इन शब्दों में
नाचते हैं आकर आकृति
कौंधती हैं रश्मियाँ