मौत दबे पाँव नहीं आती आजकल…गोलियाँ दाग़ते हुए आती है
लोग मर रहे हैं नन्दीग्राम हो या बस्तर का सुदूर बीजापुर/
भीड़ भड़क जाती है, पुलिस मज़बूर… भरभरा के दाग़ती है सतरें गोलियों की/
धाँय धाँय धू धू धाँ….भीड़ मर रही है/
उन सबके राज्यों में, जो कहते हैं खुद को चाहे राष्ट्रवादी या मज़दूरों के अलम्बरदार
हज़ारों हज़ार लोग ढो चले हैं अपने मकान अपने सिरों पर, छोड़ रहे हैं ज़मीनें अधजुती
ताकि विकास हो सके देश का/ कुछ और खरब पति कर सकें नाम रोशन/
सारा मुल्क एक SEZ है?
आज चाँद सचमुच काला पड़ गया है. तारे दिखते हैं खूनी लाल
बस कुछ लोग मरे हैं शासकों के राज में
हुक्काम अलमस्त फ़्रेन्च वाइन के लुत्फ़ में गुम/
झण्डे उठा के जो पीछे चले थे, उन्हीं के ड्ण्डे बरस रहे हैं/
SEZ का नक्शा खिंचा सा जाता है लाल लाल लकीरों से/
धान के बोझे ढोने वाली पीठें हरहरा के गिर रही हैं एक के बाद एक/
नाम बदल जाते हैं/
सरकारें सिर्फ़ सरकार हैं कार्बन कॉपी एक दूसरे की/
शुक्रिया शुक्रिया शुक्रिया..
कि विकास के डैने फ़ैल रहे गाँव गाँव गली गली/
भीतर तक चौके की सिगड़ी तक विकास/
आलू के चोखे में भी विकास नज़र आएगा…बस थोड़ा देर और..
शाम की खबर “मारे गए पुलिस के लोग नक्सलियों के हाथ झुण्ड के झूण्ड”
मार्क्स कितनी बन्दूकें छिपा गए तुम बस्तर के गिरिकाननों में?
यहाँ भी लोग मर रहे हैं/ नई भर्तियाँ नई मौत का नैवेद्य हैं/
कागज़ काले हो रहे हैं व्यर्थ ही इधर धरती लाल/
देख रहे हैं सब चुप चुपचाप गुमसुम/
जो नहीं ख्वाहिशमन्द देखने के बन्द कर लें आँख अपनी
खेल लम्बा चलेगा/
ज्ञानी विद्वज्जन कहते हैं पोथियाँ खोल खोल…आँकड़ों के मज़बूत सबूतों के साथ/
हिन्दुस्तान के जाहिल ही नहीं चाहते विकास
तुम्हारा ही भला होगा मूर्खो
क्यों नहीं चाहते मिनिरल वाटर पीना
क्यों नहीं चाहते इन्स्टेन्ट कुक्ड फ़ुड
गँवार ही रहोगे बनाओगे आलू की भुजिया हाथों से/
नहीं समझते तो मरो/
विकास की कीमत अता करो/
हम बेखबर इससे सुबह की सुर्खियों को चाय में डुबो के पी रहे हैं
“टैक्स प्लानिंग के आकर्षक उपाय” के टोस्ट के साथ/
मुद्दा अल सुबह की बहस का कि शेयर हैं प्रोफ़िटेबल या म्यूचुअल फ़ंड/
चलो नन्दीग्राम के बहाने खुल सा गया राज़
हिन्द भर में हो रही मौतें/
महामारी की मानिन्द बन्दूक का शासन/
नहीं जानता कि कीमत क्या है विकास की,
और कौन तय कर रहा है क्रेता विक्रेता इस खेल के/
बस देखता हूँ तो ये कि मेरा घर,
एक भट्टी की तरह दहक रहा है इस आँच से/