अच्छे रिटर्न वाले निवेश

May 9, 2007 at 5:28 am (कुछ इधर की कुछ उधर की)

अच्छी नौकरी लगने के बाद बहुत से लोगों के सामने समस्या ये आती है कि अब जो पैसा बच रहा है उसका क्या किया जाए? ये समस्या इस ब्लोग को पढ़ने वाले मेरे कई दोस्तों के सामने आ रही होगी/

एक तो रेडीमेड उपाय है कि बैंक में जमा कर के उसपर ब्याज खाते रहा जाए, मगर उसमें लोचा ये है कि जितने की आमदनी होती है उससे ज़्यादा टै़क्स देना पड़ जाता है मतलब जितने की भक्ति नहीं हुई उससे ज़्यादा के मँजीरे फूट जाते हैं/

कुछ जानकार लोग ये भी बताते हैं कि इन्वेस्टमेंट किया जाए/ इन्वेस्टमेंट का मतलब अलग अलग कंपनियों के शेअर में पैसा लगाना, म्यूचुअल फ़ंड में पैसा लगाना, और बीमा पॉलिसी खरीदना होता है/ मगर खरीदें तो किस कंपनी का ये समस्या है/ ज्ञानीजन इसका उत्तर देते हैं जिसका रिटर्न अच्छा हो उस कम्पनी में पैसा लगाना चाहिये/

इसी जोड़ घटाव में मैं आजकल परेशान हूँ कि कहाँ पैसा लगाया जाए/

वैसे मैंने कुछ बहुत दमदार रिटर्न देने वाली शेअर कम्पनियों और म्यूचअल फ़ंड की जानकारी इकट्ठी की है/ बिजनेस के इच्छुक लोगों की जानकारी के लिए यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ/

A. सबसे प्रमुख नाम है हिन्दुत्व & सन्स कम्पनी का- इसका हेड ऒफ़िस नागपुर में है और अन्य शाखाएं विभिन्न प्रदेशों की राजधानियों में हैं इस कम्पनी के बारे में खास बात ये है कि इसके रिटेल आउटलेट तमाम सारे कस्बों में मौज़ूद हैं जिन्हें शाखा के नाम से जाना जाता है हालाँकि इन आउटलेट्स से आजकल बिक्री थोड़ी सी डाउन है यहाँ अत्यन्त प्राचीन माल उपलब्ध रहता है जिसकी गुणवत्ता पर कोई सन्देह नहीं किया जा सकता/

वैसे तो ये कम्पनी काफ़ी पुरानी है मगर इसके शेअर होल्डर बनने क अधिकार सबको नहीं है/

इस कम्पनी ने समय समय पर अनेक म्यूचअल फ़ंड निकाले हैं जिनके नाम निम्नलिखित हैं

१. गौ-वन्श संरक्षण- यह इसका सबसे पुराना फ़ंड है जिसका रिटर्न बहुत ज़बर्दस्त तो नहीं रहा था मगर इससे कम्पनी को एक पहचान ज़रूर मिली थी/ अब भी पुराने व्यापारी लोग कभी कभी इस फ़ंड के शेअर बेचने की कोशिश यदा-कदा करते रहते हैं/

२. स्वदेशी फ़ंड- यह फ़ंड लोगों को बहुत पसन्द नहीं आया हालाँकि इस फ़ंड में कम्पनी ने कुछ अलग करने की कोशिश की थी मगर शेअर होल्डर्स का इस फ़ंड को अपनाने में नुकसान हो रह था इसलिए यह चला नहीं ज़्यादा/ बाद में रेगुलेटर्स ने इस फ़ंड की बिक्री लगभग खत्म करवा दी/

३. कम्पनी की ऎतिहासिक योजना है “मन्दिर पुनर्निर्माण योजना”- इस योजना ने वाकई लोगों की किस्मत बदल दी/

जिनको कोई उधार नहीं देता था, गाँव भर के लोगों ने उन्हें पूँजी के लिये चन्दे के रूप में चादर भर भर के पैसा दिया/ इस योजना के मेम्बर बन के कोई भी श्रद्धालु व्यापारी कई वर्षों तक निरन्तर लाभ प्राप्त कर सकते हैं हर विधानसभा चुनाव में इस योजना पर डिविडेण्ड दिया जाता है/ यह लाभ उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनावों में दोगुने से भी ज़्यादा हो सकता है/

यह योजना पहले काशी, मथुरा और अयोध्या के लिये लागू थी यानि कि वहाँ पर कम्पनी का अपनी फ़ैक्ट्री डालने का प्लान था मगर उपरोक्त योजना की अद्भुत सफ़लता को देखते हुए कम्पनी ने तय किया कि एक पूरी अलग कम्पनी “राम मन्दिर निर्मांण प्राइवेट लिमिटेड” के नाम से खोल दी जाए/ इस कम्पनी ने १९८८-८९ के दौरान गाँव-गाँव से पूँजी इकट्ठी की और कम्पनी का हेड ओफ़िस अयोध्या में बनाने की कोशिश की मगर वहाँ पर पहले से एक निजी कम्पनी कार्यरत थी जिसकी वजह से हाथा-पाई की नौबत आ गई/

इस नये उद्यम का डिविडेण्ड बहुत शानदार रहा और मालिकों की इसे खोलने की योजना पूरी तरह सफ़ल साबित हुई/ यहाँ तक कि इस कम्पनी के लाभांशों पर आयकर की छूट भी मिल गई/ इसके चूँकि ग्राहक बहुत ज़्यादा थे इस लिये यह तय किया गया कि इस स्कीम को सिर्फ़ चुनावों के समय ही जनता के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा बाकी समय दूसरे छोटे-छोटे फ़ंड उपलब्ध कराए जाएंगे/ इस योजना का पे-बैक समयावधि बहुत कम रही मतलब ये कि बहुत जल्दी रिटर्न मिलना शुरू हो गए/

अयोध्या-मन्दिर म्य़ूचुअल फ़ंड पहले एक बम्पर रिटर्न दे चुका है इस रिटर्न का लाभ ये हुआ कि उस समय जिसने भी इसके शेअर इफ़रात में खरीद लिये वे सब मन्त्री विधायक सांसद तक हो गये/ कुछ लोग केन्द्र में मन्त्री भी बने और अभी तक बन रहे हैं/

४. तुष्टिकरण विरोधी म्यूचअल बेनेफ़िट ट्रस्ट- यह ट्रस्ट बहुत ही नेक उद्देश्यों के साथ कम्पनी ने अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियाँ निभाने के लिये गठित किया है/ इसमें आप अलग अलग समय में अलग अलग प्लान खरीद सकते हैं/ इस ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी एक पश्चिमी प्रदेश के मुख्यमन्त्री हैं जिनका काम इस ट्रस्ट के सामाजिक सोद्देश्यों को प्रचारित करना और उन्हें बढ़ावा देना है/

निरन्तर बढ़ती लोकप्रियता और जबर्दस्त बिजनेस के कारण कम्पनी को इस बाज़ार में प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है/ यह प्रतियोगिता ठाकरे & सन्स की वजह से महाराष्ट्र में बढ़ गई है साथ ही कम्पनी के एक पूर्ववर्ती निदेशक ने अपनी अलग कम्पनी लाँच कर दी है/ इन सब कारणों के चलते अभी कुछ रिटर्न में कमी आई है/

कम्पनी नए उपायों के साथ शेअर होल्डर्स को रिझाने में लगी है साथ ही ये बता भी रही है कि “असली हिन्दुत्व सिर्फ़ हम बेचते हैं, इस शहर में हमारी कोई अन्य शाखा नहीं है, नक्कालों से सावधान” /

B. बाज़ार की सबसे पुरानी कम्पनी काँग्रेस & फ़ैमिली प्राइवेट लिमिटेड है यूँ तो इस कम्पनी ने लॊंग टर्म इन्वेस्टर्स को जबर्दस्त लाभांश दिये हैं मगर छोटी अवधि के निवेशकों के लिए इस कम्पनी में फ़िलहाल कोई आकर्षक योजना उपलब्ध नहीं है/

इस कम्पनी की खास बात ये है कि इसका निदेशक मंडल यानि बोर्ड ओफ़ डायरेक्टर्स हमेशा एक जुट रहता है सी.ई.ओ. के पीछे और सी.ई.ओ.  की पोस्ट एक ही व्यक्ति के पास आजन्म बनी रहती है/ यदि परिवार में कोई बच्चा पैदा होता है तो कम्पनी को आने वाले सत्तर साल तक नए सी.ई.ओ. की तलाश नही करनी पड़ती/ इस वजह से कम्पनी बाज़ार में स्थिरता की गारंटी का दावा करती है/ इस कम्पनी ने अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया है “गरीबी हटाओ-बम्पर रिटर्न योजना” में/ इस का रिटर्न वाकई बम्पर रहा था और इस रिटर्न के चलते कई सालों तक शेअर होल्डर्स को लाभांश बाँटे जाते रहे/ इस कम्पनी ने अपने टारगेट क्लाइंट के हिसाब से अलअग अलग उत्पाद मार्केट में उतारे हैं जिससे कि इसका पोर्ट्फ़ोलिओ विविधीकृत है/ इस की सबसे खास बात ये है कि यह कम्पनी तब अच्छा प्रदर्शन करती है जब उम्मीद बिल्कुल कम हो/

अभी मार्केट में ताज़ा फ़ंड इन्होंने उतारा है उसका नाम है “ओ.बी.सी. आरक्षण इन्सेन्टिव प्लान” इसके तहत कम्पनी अपना पब्लिक ऒफ़र देने जा रही है ताकि रिटर्न्स अगले चुनाव तक प्राप्त किये जा सकें मगर कुछ तकनीकी अड़ंगों के चलते यह प्लान ज़ोर की बिक्री पकड़ नहीं पा रहा है/ इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कुछ छोटी कम्पनियाँ इस तरह के ऒफ़र के साथ पहले से ही तैयार बैठीं हैं/

C. इन दो मुख्य कम्पनियों के अतिरिक्त छोटे -छोटे योजनाओं वाली भी कुछ कम्पनियाँ है जिनका रिटर्न पिछले चुनाव वर्षों में ठीक-ठाक रहा है जैसे कि “दलित-वर्ग बेवकूफ़ बनाओ ट्रस्ट” -प्रायोजक मायावती&मायावती, मुस्लिम हिमायत शेअर होल्डर्स- मालिक मुलायमसिंह (असली समाजवादी)

D. इन सबके अतिरिक्त एक ऐतिहासिक IPO का उल्लेख किये बिना जानकारी अधूरी रह जाएगी/ दर-अस्ल अयोध्या मन्दिर म्यूचअल फ़ंड इस IPO को टक्कर देने के लिये ही उतारा गया था/ इस का नाम है “मंडल मिलेनियम मेगा ओफ़र” - इस ओफ़र में नया कुछ नहीं था बल्कि यह तो काफ़ी पहले एक बिजनेस प्रोसेस रि-एन्जिनीयरिंग की रिपोर्ट में पड़ा हुआ था/ मगर अचानक ही कम्पनी के सी.ई.ओ. की नज़र इस पर पड़ी जो कि कम्पनी के अन्दरूनी विद्रोहों से परेशान थे/ उनके इस प्रस्ताव को हाथ लगाते ही उनके स्वयं और इस प्रस्ताव, दोनों के दिन बदल गए/

कम्पनी हालाँकि बाद में दिवालिया हो गई मगर तगड़े रिटर्न देके गई/ इस कम्पनी से टूट के बनी कम्पनियाँ आज तक इस IPO की तर्ज़ पर मॊडल उतारते रहती हैं/

तो भाई आपके सामने ये सब कम्पनियाँ और उनके स्कीम्स हैं/ बस ये तय कीजिये कहाँ इन्वेस्ट करना है हर तरह का प्लान हाज़िर है/ 

2 Comments

  1. Pratik Pandey said,

    May 9, 2007 at 8:29 am

    बहुत खूब?, क़रारा व्यंग्य है। लगता है आजकल व्यंग्य विधा पर हाथ आज़माए जा रहे हैं। वैसे, आप कांग्रेस & फ़ैमिल के पार्टनर हसिया-हथौड़ा कम्पनी के बारे में बताना भूल गए हैं। उनके बाबत भी कुछ उवाचिए।

  2. devanand said,

    May 9, 2007 at 9:04 am

    bhaiya,

    hindutwa ke khilaf likh kar, tum jaise hindu apne aap ko bahut kabil samajate ho. Jara apne bap ko yeh pada kar deho. Oh bhi tumhare is gyan pe apna matha petenge aur anhegi ki tumhe kuyn paida kiya?

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